उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का छात्रों से आह्वान, ‘राष्ट्र प्रथम’ को बनाएं जीवन का मंत्र

Sun 16-Aug-2026,11:36 PM IST +05:30

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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का छात्रों से आह्वान, ‘राष्ट्र प्रथम’ को बनाएं जीवन का मंत्र SRMIST Convocation
  • उपराष्ट्रपति ने छात्रों से ‘राष्ट्र प्रथम’ को जीवन का मंत्र बनाने की अपील की।

  • AI, क्वांटम तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में नवाचार पर जोर दिया।

  • युवाओं से नशे से दूर रहकर अनुशासन और उत्कृष्टता अपनाने का आह्वान।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने चेन्नई के पास चेंगलपट्टू के कट्टनकुलथुर स्थित एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (SRMIST) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने स्नातक छात्रों से अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने तथा ‘राष्ट्र प्रथम’ को अपने जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और ज्ञान का उत्सव है। इसके साथ ही यह जीवनभर जिम्मेदारी और सेवा की यात्रा की शुरुआत भी है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे केवल भविष्य के लिए तैयारी न करें, बल्कि भविष्य को आकार देने के लिए तैयार हों।

श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने SRMIST के ऐसे शैक्षणिक वातावरण की सराहना की, जो अंतरविषयक शिक्षा, रचनात्मकता, उद्यमिता और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देता है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर अनुसंधान, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में संस्थान के बढ़ते ध्यान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उपराष्ट्रपति ने अनुसंधान को प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यावहारिक समाधानों में बदलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा अनुसंधान ही वास्तविक अर्थों में सफल है, जो लोगों के जीवन में सुधार लाए, उद्योगों को मजबूत करे और सतत विकास में योगदान दे। उनके अनुसार अनुसंधान का सर्वोच्च उद्देश्य समाज की सेवा करना है।

भारत की स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा में प्रगति का उल्लेख
श्री राधाकृष्णन ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 100 से अधिक देशों को कोविड-19 टीके उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवीय सहायता को व्यावसायिक दृष्टिकोण से नहीं देखा और मानवता के कल्याण को प्राथमिकता दी।

उपराष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद देश में 16 आईआईआईटी, 8 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 8 आईआईएम, 7 आईआईटी, 2 आईआईएसईआर, 1 एनआईटी और 12 एम्स स्थापित किए गए हैं। उनके अनुसार वर्तमान में भारत में 1,425 से अधिक विश्वविद्यालय, 54,000 कॉलेज और 16,850 स्वतंत्र संस्थान हैं।

उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार महिलाओं का नामांकन 2014-15 में 1.57 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 2.24 करोड़ हो गया, जो 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने दीक्षांत समारोहों में महिलाओं द्वारा बड़ी संख्या में डिग्री और पदक हासिल करने को स्वागत योग्य बदलाव बताया।

युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील
उपराष्ट्रपति ने छात्रों से मादक पदार्थों और नशीले पदार्थों के सेवन से पूरी तरह दूर रहने की अपील की। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे ध्यान भटकाने वाली चीजों के बजाय अनुशासन, प्रलोभन के बजाय उद्देश्य और आसान रास्तों के बजाय उत्कृष्टता को चुनें।

उन्होंने तमिलनाडु में हाल ही में हुई उस घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें मादक पदार्थों के व्यापार के बारे में जानकारी साझा करने वाले एक छात्र की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उन्होंने अपने परिवार के किसी सदस्य को खो दिया हो। समारोह में उन्होंने स्नातकों और छात्रों को ‘नशीली दवाओं को ना कहें’ की शपथ भी दिलाई।

‘राष्ट्र प्रथम’ को बनाया जीवन का आधार
श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि स्नातक भारत के विकसित भारत@2047 के निर्माण की महत्वपूर्ण यात्रा में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित, नवोन्मेषी, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका निर्णायक है।

उन्होंने छात्रों से संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने, विविधता का सम्मान करने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसके लोग और विशेष रूप से युवा हैं।

समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के ऑटोमोटिव बिजनेस अध्यक्ष श्री आर. वेलुसामी को मानद उपाधि प्रमाण पत्र प्रदान किया। इसके अलावा स्नातकों को पदक, रैंक और उपाधियां प्रदान की गईं।

इस अवसर पर तमिलनाडु और केरल के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, SRMIST के कुलाधिपति डॉ. टी. आर. पारिवेंधर, प्रो-चांसलर डॉ. रवि पचामुथु, प्रो-चांसलर (अकादमिक) डॉ. पी. सत्यनारायणन, कुलपति डॉ. सी. मुथमिज़्चेलवन सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।